Jal Sanrakhsan In Hindi | जल संरक्षण Water Conservation Essay In Hindi

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Jal Sanrakhsan In Hindi | जल संरक्षण Water Conservation Essay In Hindi

जल या पानी उन पंचभूतों में से एक है जिनके बिना ये सृस्टि में जीवन असंभव है। बिना पानी के जीवन संभव नहीं है। पीने के लिये शुद्ध जल हमारे लिये जरूरी है। क्योंकि स्वच्छ एवं सुरक्षित जल अच्छे स्वास्थ्य की कुंजी है। धरती के दो तिहाई हिस्से पर पानी भरा हुआ है। फिर भी पीने योग्य शुद्ध जल पृथ्वी पर उपलब्ध जल का मात्र एक प्रतिशत हिस्सा ही है। 97 प्रतिशत जल महासागर में खारे पानी के रूप में भरा हुआ है। शेष रहा दो प्रतिशत जल बर्फ के रूप में जमा है।


धरती पर जितनी पानी की मात्रा है उस सब में से 1% पानी ही हमारे पीने लायक है। फिर भी लोग अक्सर पानी की बर्बादी करते रहते हैं इसीलिए हमें ज्यादा से ज्यादा पानी की बचत करनी चाहिए वरना वो दिन दूर नहीं जब हम पानी की एक -एक बूँद के लिए तरसेंगे जल है तो कल है। जहाँ पानी होता है, वहां जीवन होता है।

पानी के बिना जीवन संभव नहीं है। हमारी पृथ्वी ही एक ऐसा ग्रह है जिस पर जीवन संभव है, क्योंकि यहाँ पानी और जीवन को संभव बनाने वाली अन्य सभी जरुरी चीजें उपलब्ध हैं। अन्य ग्रह जैसे की मंगल, बुध या शुक्र पर जीवन सम्भव नहीं है। वे किसी बंजर रेगिस्तान के सामान हैं क्योंकि वहाँ पानी नहीं पाया जाता है। पानी जीवन के लिए जरुरी है और साथ ही यह वातावरण को भी स्वच्छ बनाता है।

हमें यह मालूम है कि विश्व में कई देश ऐसे हैं जो सूखा ग्रस्त हैं अर्थात जहाँ वर्षा होती ही नहीं अथवा जहाँ नदियों का अभाव है और ऐसे स्थान पानी के लिए तरसते हैं। लोगों को कई मील दूर जाकर अपने लिए पानी का इंतजाम करना पड़ता है। कई स्थानों पर प्रकृति के इस अमूल्य उपहार को खरीद कर प्रयोग किया जाता है। कई लोग तो इसकी कमी के कारण अथवा दूषित जल से होने वाली गंभीर बीमारियों के कारण ही मर जाते हैं। नदियों में पानी की कमी, भूमिगत जल के स्तर में कमी, पेड़-पौधों की घटती संख्या, कृषि उत्पादन में कमी, आदि ये कुछ ऐसे दुष्परिणाम हैं कि यदि आप भविष्य के विषय में सोचें तो कांप जायें। यह सब जानते हुए भी हम पानी को लापरवाही से प्रयोग में लाते हैं यह सोचे बगैर कि अगर हमने सावधानी नहीं बरती तो यही स्थिति हमारी भी होगी।
यद्यपि कुछ संस्थायें जल संरक्षण पर कार्य कर रही हैं परन्तु मात्र इतना प्रयास ही बहुत नहीं है। यह विश्वव्यापी समस्या है इसलिए पूरे विश्व के लोगों को मिलजुल कर इसमें सहयोग करना होगा तभी इस अमूल्य सम्पदा को बचाया जा सकता है। इसके लिए हमें शुरूआत अपने घर से ही करनी होगी। 
हमें अपने घर में बूँद-बूँद करके बहते पानी को बचाना होगा। फव्वारे या सीधे नल के नीचे बैठ कर नहाने की बजाय बालटी और मग का प्रयोग करें। घर के बगीचे में पानी देते समय पाईप की बजाय फव्वारे का प्रयोग करें। ज्यादा से ज्यादा पेड़-पौधे लगायें जिससे वर्षा की कमी न हो। हो सके तो पौधे बरसाती मौसम में ही रोपें जिससे उन्हें पौधे को प्राकृतिक रूप से पानी मिल जाये। घर में ऐसे पौधों को लगाने की कोशिश करनी चाहिये जो कम पानी में भी रह सकते हैं। 
सरकार को कुछ ऐसी नीति बनानी होगी कि औद्योगिक इकाइयों से निकलने वाला पानी नदी-नालों में न मिले। इसके निस्तारण की कुछ अच्छी व्यवस्था हो जिससे खतरनाक रसायन पीने योग्य पानी में मिलकर उसे दूषित न कर पायें। धरती पर बढ़ती जनसंख्या के दबाव पर भी ठोस कदम उठाये जाने चाहियें। बरसाती जल इकट्ठा करने एवं प्रयोग करने लायक बनाने की छोटी इकाइयों को बढ़ावा देना चाहिये जिससे बरसाती जल व्यर्थ न जाये।
निस्कर्स
जल ही जीवन है। यह पंक्ति कोई अतिशयोक्ति नहीं है। जल के बिना जीवन संभव ही नहीं है। हमारे जीवन की सभी कार्यों के लिए जल बहुत ही महत्वपूर्ण है। कई कार्य जल के बिना हो ही नहीं सकते। यह जानते हुए भी व्यक्ति इसे बर्बाद करने में कसर नहीं रख रहा है।

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